सच्चा हीरा की कहानी, Hindi Story with Moral 2021

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प्रस्तुत सच्चा हीरा कहानी में व्यक्ति के बुद्धि  के साथ-साथ उसके कर्म को भी महत्त्व दिया गया है। अच्छा बुद्धि, अच्छी बात है लेकिन वह आचरण में नहीं है तो निरर्थक हैं। इस बात को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। 

सच्चा हीरा

सूर्य अस्त हो रहा था। पक्षी चहचहाते हुए अपने-अपने नीड की ओर जा रहे थे। गाँव की कुछ स्त्रियाँ पान लेने के लिए बड़े लेकर कुएँ की ओर चल पड़ी। पानी भरकर कुछ कियाँ तो अपने घरों को लौट गई परन्तु उनमें से चार, कुएँ की पक्की जगत पर बैठकर आपस में इधर उधर की बातें करने लगी। बातचीत करते-करते बात बेटों पर जा पहुँची उनमें से एक की उम्र सबसे बड़ी लग रही थी। वह कहने लगी, “भगवान सबको मेरे बेटे जैसा बेटा दे। मेरा बेटा लाखों में एक है। उसका कंठ बहुत मधुर है। वह बहुरा अच्छा गाता है। उसके गीत को सुनकर कोयल और मैना भी चुप हो जाती है। लोग बड़े चाव से उसका गीत सुनते हैं।” 
उसकी बात सुनकर दूसरी स्त्री का मन हुज कि वह भी अपने बेटे की प्रशंसा करे। उसने पहली स्त्री से कहा,” मेरे बेटे को बराबरी कोई नहीं कर सकता। वह बहुत ही शक्तिशाली और बहादुर है। वह बड़े-बड़े बहादुरों को भी पछाड़ देता है। वह आधुनिक युग का भोम है।’ ‘ यह सब सुनकर तीसरी औरत भला कैसे चुप रहती? वह बोल उठी, “मेरा बेटा साक्षात बृहस्पति का अवतार है। वह जो कुछ पढ़ता है, एकदम याद कर लेता है। ऐसा लगता है मानो उसके कंठ में सरस्वती का निवास हो।”
तीनों औरतों की बातें सुनकर चौथी स्त्री चुपचाप बैठी रही उसने अपने बेटे के बारे में कुछ न कहा। पहली ने उसे टोकते हुए कहा, “क्यों बहन तुम क्यों चुप हो? तुम भी तो अपने बेटे के बारे में कुछ बताओ.” चौथी स्त्री ने बड़े ही सहज भाव से कहा, “मैं अपने बेटे की क्या प्रशंसा करूँ वह न तो गंधर्व—सा गायक है, न भीम-सा बलवान और न ही बृहस्पति—सा बुद्धिमान।” 
कुछ समय बाद जब वे सब घड़े सिर पर रखकर लौटने लगी, तभी किसी गीत का मधुर स्वर सुनाई पड़ा। सुनकर पहली स्त्री बोली, “सुनी, मेरा हीरा गा रहा है। तुम लोगों ने सुना, उसका कंठ कितना मधुर है?” वह लड़का गीत गाता हुआ उसी रास्ते से निकल गया। उसने अपनी माँ की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इतने में दूसरी स्त्री का बेटा उधर से आता दिखाई दिया। दूसरी स्त्री उसे देखकर गर्व से बोली, “देखो, वह मेरा लाडला बेटा आ रहा है। शक्ति और सामर्थ्य में इसकी बराबरी कौन कर सकता है?” वह यह कह ही रही थी कि उसका बेटा भी उसकी ओर ध्यान दिए बिना ही निकल गया। 
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Sachcha Heera ki Kahani
वे कुछ आगे बढ़ीं तो एकाएक तीसरी स्त्री का बेटा उधर से संस्कृत के श्लोकों का पाठ करता हुआ निकला। उसके उच्चारण से ऐसा लग रहा था मानो उसके कंठ में साक्षात् सरस्वती विराजमान हो। तीसरी स्त्री ने गद्गद् स्वर में कहा, ” देखो, यही है मेरी गोद का हीरा। इसे कौन बृहस्पति का अवतार नहीं कहेगा? “परन्तु उसका बेटा भी माँ की ओर देखे बिना आगे बढ़ गया। (Sachcha Heera ki Kahani)
वह अभी थोड़ी ही दूर गया था कि चौधी स्त्री का बेटा भी अचानक उधर से आ निकला। वह देखने में बहुत ही सीधा-सादा और सरल प्रकृति का ला रहा था। उसे देखकर चौथी स्त्री ने कहा,” बहन यही मेरा लाल है।”  
चौथी स्त्री उसके बारे में बता ही रही थी कि उसका बेटा पास आ पहुँचा। अपनी माँ को देखकर वह स्क गया और बोला, ” माँ, लाओ मैं तुम्हारा घड़ा पहुँच हूँ। ” मना करने पर भी उसने माँ के सिर से पानी से भरा घड़ा उत्तारकर अपने सिर पर रखा और घर की ओर चल पड़ा। 
तीनों औरतें बड़े ही आश्चर्य से चौथी स्त्री के बेटे को देखती रहीं। एक वृद्ध महिला जो बहुत देर से इन औरतों के पीछे चलती हुई इनकी बातें सुन रहीं थी, पास आकर बोली “देखती क्या हो? यही सच्चा हीरा ‘ है।”

Note: इस वार्ता(story) को किस लेखक(author) ने लिखा है वो में जनता नही हु, अगर आप कोई जानते हो तो Comment Box में जरूर लिखे। 
 
मित्रो, मै आशा करता हु की आपको हमारी यह सच्चा हीरा की कहानी, Hindi Story with Moral पोस्ट पसंद आयी होगी। और ऐसी ही अच्छी-अच्छी कहानिया पढ़ने के लिए हमारी Jadui Kahaniya वेबसाइट को visit करते रहिए।

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