खरगोश और हाथी की कहानी | Rabbit and Elephant Story in Hindi

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खरगोश एक छोटा-सा जानवर है और हाथी बहुत बड़ा। Khargosh aur Hathi ki Kahani में खरगोश किस प्रकार अपनी समझदारी से हाथियों से अपनी रक्षा करते हैं, इसका वर्णन है। यह कहानी ‘पंचतन्त्र’ से ली गई है। 

खरगोश और हाथी की कहानी

एक जंगल में एक सरोबर था। सरोवर के किनारे गीली जमीन थी। वहाँ बहुत-से खरगोश रहते थे। खरगोशो के चिल जमीन के अंदर थे। वे दिनभर इधर-उधर कूदते रहते। नरम-नरम घास नाते। रात को अपने घरों में सो जाते। चे सब बहुत प्रसन्न रहते थे। उसी जंगल में कुछ हाथी आ गए. हाथियों के झुंड में कुछ शरारती हाथी थे। वे अपनी सँड़ से छोटे-छोटे पेड़ तोड़ देते। पौधे कुचल देते। हाथियों के बच्चे खेल-खेल में एक-दूसरे से लड़ते। कभी एक छोटा हाथी नीचे होता, कभी दूसरा। 
हाथी पानी से बद्त प्यार करते हैं। वे सूंड़ में पानी भर-भर कर नहाते। फिर सरोवर के किनारे मिट्टी में लौटते। नरम जमीन उनके भार से दब जातीं। साथ ही कई खरगोश परिवार भी दब जाते। बृससे खरगोश बहुत दुःखी थे। 
खरगोशों के सरकार ने एक उपाय सोपा। कुछ चुने हुए खरगोशो के साथ वह हाथियों के सरदार के पास गया। कुछ दूरी पर बैठ खरगोशों के सरदार ने अपने अगले पाँच उटाए. उसने उन्हें हाथ जोड़ नमस्कार किया। हाथी ने सूड उठाकर नमस्कार का उत्तर दिया। 
खरगोश सरदार बोला, हम चाँद के भानजे है। चाँद में आप हमारे भाई-बंधुओं को देख सकते हैं। हगार कुछ भाई धरती पर रहने आए हैं। 
ममा रोज सरोवर में आतं, हमसे मिलने। वे आपसे नाराज है। हाथी बोला । “चया? क्यों नाराज है? हमने क्या किया है?  (Khargosh aur Hathi ki Kahani)
खरगोश बोला,” सरोवर के समीप नरम मिट्टी में सुराख्न कर हम्ने अपने घर बनाए हैं आपके आने से सुराख दब गए जिससे चंदा मामा के बहुत-से भानजे दब गए. इसलिए वे आपसे बहुन नाराज़ हैं। 
खरगोश और हाथी की कहानी
खरगोश आगे बोला,” ये रात को स्रोयर में आएँगे और उन्हें यह देखकर अच्छा नहीं लगेगा। 
रात हुई। पूर्णमासी का चाँद निकला। हवा तेज थी। सरोवर में हलकी-हलकी लहरें उट रही थीं। चाँद लहरों के साथ-साथ ऊपर-नीचे हो रहा था। 
हाथी और खरगोश वहाँ पहुँच गए।  खरगोश बोला, “देखिए महाराज, चंदामामा गुस्से से कॉप रहे हैं। आप जल्दी यहाँ से दूर चले जाएँ। लगता है, मामा बहुत नाराज हो रहे हैं।” 
हाथियों के सरदार ने अपने झुंड को तरफ देखा। सभी डर गए थे। सरदार ने अपनी सूड ऊपर उठाई. सभी हाथियों ने ऐसा ही किया। अब सरदार बोला, चमकते हुए चौद को हमारा नमस्कार। हम अपनी गलती मानते हुए आपसे क्षमा माँगते हैं। आप हमें क्षमा करें। हम अभी दूसरे जंगल में चले जाते हैं। अब ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे दूसरों को तकलीफ़ हो। 
 
Note: इस वार्ता(story) को किस लेखक(author) ने लिखा है वो में जनता नही हु, अगर आप कोई जानते हो तो Comment Box में जरूर लिखे।
 
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मित्रो, मै आशा करता हु की आपको हमारी यह खरगोश और हाथी की कहानी, Rabbit and Elephant Story in Hindi पोस्ट पसंद आयी होगी। ऐसी ही मजेदार कहानिया पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट jaduikahaniya.com की मुलाकात लेते रहिए। 

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