चन्द्रशेखर आज़ाद का जीवन परिचय हिंदी में | Chandra Shekhar Azad Story in Hindi

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प्रस्तुत संस्मरण चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय हिंदी में लेखक ने चन्द्रशेखर आज़ाद से जुड़ी हुई स्मृतियों के माध्यम से उनके जीवन व्यक्तित्व तथा उनकी निडरता पर दृष्टिपात किया है। असाधारण प्रतिभा के धनी चन्द्रशेखर आजाद शक्ति के पुंज थे। उन्हें अपने आप पर पूर्ण विश्वास था। आकर्षक व्यक्तित्व, निडर, आत्म निर्भर, मितभाषी इस वीर पुरुष को स्वर्गीय कहने से लेखक को बड़ी चोट पहुँचती है। उनसे जुड़ी अनेक सूक्ष्म बातों पर लेखक ने प्रकाश डाला है। 

चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय हिंदी में

उन्हें स्वर्गीय कहते चोट लगती है। न जाने उनकी स्मृति आज क्यों सजग हो उठी। भूलना एक महान गुण है। वह समय का विस्तार है। स्मृति के बोझ का वह विश्राम हैं। शरीर में लगे हुए खरोचे, देह में लगे हुए घाव, समय के सहारे सूखते और भरते हैं। मन पर लगी हुई चोट, हृदय पर लगा हुआ आघात विस्मृति के सहारे ही ठीक हो पाता हैं। स्मृति की तीव्रता शास्त्रों के अनुशीलन और पुस्तकों के स्वाध्याय से मिलती है और विस्मृति का वरदान सन्तों के सत्संग और विराग के अनुष्ठान से प्राप्त होता है। यदि संसार में विस्मृति, स्वत: सिद्ध न हो, तो लोग अपने-अपने घाव प्रतिदिन कुरेदते रहें और जीवन कोढ़ की खाज हो जाए. 
क्षण आते हैं और चले जाते हैं। उनके आवर्तन में स्मृतियों की छाप लगती और धुलती चलती है। धुले हुए पाटव के भीतर से भी कुछ आकार झाँककर रूपरेखा से परिचय कराया करते हैं। ये आकार क्षणों के शृंगार भी हो सकते हैं, चाहे स्वत: कितने ही सुखमय हों और वे आकार क्षणों के अभिशाप भी हो सकते हैं, चाहे स्वत: कितने ही सुखपूर्ण हों। वे व्यक्ति, वे घटनाएँ, वे परिस्थितियाँ धन्य हैं; जिनको अमिट छाप क्षणों का शृंगार है। उनके लिए विस्मृति समय के प्रवाह को रोककर स्वयं घण्टों प्रतीक्षा करती है। मन में सन्तत्व और चिराग की स्वतः वर्षा हुआ करती है। 
चन्द्रशेखर एक ऐसे ही व्यक्ति, ऐसी ही घटना और ऐसी ही परिस्थिति थे। उनकी स्मृति मन का पुण्य है। 
मेरी न जाने कितनी बार उनसे भेंट हुई होगी। मेरे छोटे भाई के मित्र होने के कारण वे मुझे हमेशा भइया कहा करते थे। किसी के घर, किसी सड़क पर, किसी रेलवे स्टेशन पर, जिस हालत में भी वे दिन के किसी क्षण में मुझे मिले। उन्होंने हमेशा ही मेरे प्रति अग्रज का सम्मान प्रदर्शित किया। क्रान्तिकारी लोग वचन के बड़े कृपण और मन्तव्य के बड़े गोप्य होते थे, पर उन्होंने अपना समझकर मुझसे कभी कोई दुराव नहीं रखा। उन्हें भय बिलकुल न था। वे निश्चिन्त थे कि वे जीते-जी किसी के हार्थो नहीं आ सकते। कटि से लटकते हुए दो माउज़र पिस्तोल और कन्धे पर पड़ी हुई कारतूस की पेटी पर उनका पूरा भरोसा था। जिस किसी के घर हम लोगों ने उन्हें छिपाकर रखने की व्यवस्था की, उसे वे हमेशा निश्चिन्त रखते थे। उन्होंने स्पष्ट कह रखा था कि वे चार घर दर पहुँच कर तमंचे बजाएँगे जिससे उनके आश्रयदाता पर कोई आपत्ति न आ सके। 
उन्होंने महात्मा गांधी की अहिंसा की निस्सारता पर मुझे घण्टों समझाया होगा और मैंने उनको हिंसा पद्धति की खुलकर बुराई को होगी, पर हम दोनों का पारस्परिक आदर बढ़ता ही गया, क्योंकि हम दोनों अपने विचार में ईमानदार थे। मेरा विचार केवल तर्क का शृङ्गार और मानसिक प्रयत्य मात्र था। उनके व्यवहार पक्ष की शक्ति मुझमें न थी। उनका विचार कर्म की शोभा और योगक्षेम का प्रकाश था। उनके व्यक्तित्व में इतना बल था कि मेरी इच्छा के प्रतिकूल वे मुझसे काम ले लिया करते थे और उनकी बात पूरी करने में मैं अपने को गौरवान्वित अनुभव करता था। 
क्रांतिकारियों के कई विस्फोट कार्य और मेरे परिचय के अन्तरकाल में ही हुए, पर उन पर बातें करने और पूछने का मुझे संभव न था जो भी थोड़ा बहुत वे संकेत कर देते थे, मेरी मुद्रा में उसका अनुमोदन न देखकर प्रसंग टल जाया करता था। उनका शरीर शक्तिका पुंज था और उनकी आत्मनिर्भरता की प्रतिकृति। उनकी स्फीत शिराओं में उष्ण रक्त का भरपूर प्रवाह या। उनके कार्यों की शोभा मुखरता और वाणी की शोभा मौन थी। (chandra shekhar azad essay in hindi)
न जाने कितने रूपों में मैंने उन्हें देखा होगा। कलंगीदार पंजाबी पगड़ी और ढीले सलवार में वे जितने अच्छे लगते थे, खद्दर के कुरते और बंगाली धोती में भी वे वैसे हो खिलते थे। साधारण तया वे खुले गले का कोट और दोनों पैरों को कछौटे से ढकनेवाली धोती पहनते थे। मैंने उन्हें सूट और हैट में भी देखा है और पूरे पंजाबी परिधान में भी। हर प्रकार के वस्त्र के भीतर वे खिलते थे।
चन्द्रशेखर आज़ाद
कठोर और हिंसापूर्ण संदर्भ के भीतर उनका मक्खन सदृश कोमल मन मैंने अच्छी तरह देखा है। उनकी वीरता में जो उग्रता थी, उसका लक्ष्य राजनीतिक अपराध था और भारत को स्वतन्त्र करने की बलवती आकांक्षा थी। उनके साहस में जो ध्वंस की सूचना थी, उसका आलम्बन विदेशियों के पशुबल की अकड़ थी। अपने देश के जो निरीह प्राणी उनके क्रांति के मार्ग में आने के कारण नष्ट हो जाते थे, उनके लिए चन्द्रशेखर के पास अपार सहानुभूति और छलकते हुए आँसू थे। पर उनकी सार्वजनिक कार्यपद्धति में दया का दूसरा नाम कायरता और क्षमा का दूसरा नाम आपत्ति था। मेरे जैसे उदात्त वृत्तियों की दुहाई देने वाले व्यक्तियों को उन्होंने परिणाम द्वारा कई बार प्रमाणित कर दिया था कि उनकी ही कार्य-पद्धति समीचीन हैं। 
ईश्वर, धर्म और पाप-पुण्य विषयक विवाद के लिए उनके पास समय न था। इस तर्क-वितर्क को वे अवकाश का वाविलास समझते थे। मैं कह नहीं सकता कि उनकी इन विषयों के सम्बन्ध में क्या मान्यताएँ थीं। पर यह निर्विवाद कहा जा सकता है कि जिस मान्यता से मन में हिचक, शैथिल्य, कार्यभीरुता, बुद्धिवाद, पलायनवाद को अवसर मिले, उसके वे पूर्ण प्रतिकूल थे। (chandra shekhar azad story in hindi)
हाँ, पर पाप और पुण्य को अनेकार्थी और आज की व्यापक व्याप्ति को चाहे वे न मानते हों-और कादाचित् नहीं भी मानते थे-परन्तु जीवन की पवित्रता, सामाजिक निर्मलता, वैयक्तिक उज्जवलता तथा नैतिक उच्चता के वे बड़े पोषक थे। कोई यह विश्वास नहीं कर सकता कि हत्याओं को बेधड़क कर डालनेवाले हाथ स्पर्श में इतने कोमल और नागरिक हो सकते हैं।
मैं जब इन पंक्तियों को लिख रहा हूँ, तब भी उनकी मनुहार मेरे सामने घूम रही है। कितने अधिक व्यक्तियों में उनकी ममता की जड़ें जमी हैं, यह आज उनके उन्मूलित होने के बाद ज्ञात हो रहा है। राजनीतिक उन्हें सराहें और स्वतन्त्रता प्राप्ति का अग्रदूत समझकर उनकी प्रतिमा बनाकर अर्चना करें। इतिहासकार अपनी पुस्तकों को उनकी प्रशंसा से सजावें और उनके महत्त्व का निर्णय करें, साहित्यक उन पर उपन्यास, कहानियाँ और काव्य की रचना करके उन्हें अमर बना दें, सम्पादकगण उनापर लेख और टिप्पणियाँ लिखकर उनके साथी और सहकारी सभाओं में भाषण दें और एकांत में आँसू बहावें; परन्तु मेरे ऐसे अलग देखनेवाले किन्तु निकट अनुभव करनेवाले, कर्मक्षेत्रों से कोसों दूर, प्राणी केवल धवल कागज पर कुछ काली सतरें खींचने के अतिरिक्त कर ही क्या सकते हैं? इन पंक्तियों को उकसानेवाले भी वही हैं, उन्हीं की विस्मृति तक पहुँचने के लिए उन्हीं की स्मृति को आज की पंक्तियाँ अर्पित हैं। 
 
Note: इस वार्ता(story) को किस लेखक(author) ने लिखा है वो में जनता नही हु, अगर आप कोई जानते हो तो Comment Box में जरूर लिखे।
मित्रो, मै आशा करता हु की आपको हमारी यह चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय हिंदी में और Chandra Shekhar Azad Story in Hindi पोस्ट पसंद आयी होगी। ऐसी ही मजेदार कहानिया पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट jaduikahaniya.com की मुलाकात लेते रहिए। 

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